कटास राज प्राचीन शिव मंदिर


  पाकिस्तान के चकवाल जिले में कटास राज प्राचीन शिव मंदिर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता सती की मृत्यु हुई थी, तो भगवान शिव इतना रोए थे कि उनके आंसुओं (TEARS) से दो कुंड बने-एक पुष्कर (भारत) में और दूसरा यहाँ कटास राज में। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कुंड का पानी सदियों से कभी नहीं सूखा और इसका रंग गहरा हरा/नीला रहता है। माना जाता है कि इस पानी में नहाने से पाप धुल जाते हैं।

कटास राज मंदिर — एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल

📍 स्थान: कटास गाँव के पास, चकवाल जिला, पंजाब प्रांत, पाकिस्तान में। �


📜 इतिहास और महत्व:

यह मंदिर परिसर सोमारोह से 6वीं शताब्दी ईसापूर्व से लेकर 10वीं शताब्दी तक बने कुछ मंदिरों का समूह है, जिन्हें हिन्दू शाही राजाओं के समय बनाया गया माना जाता है। �


कटास नाम संस्कृत के “कटाक्ष” शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है देवता के आँसू — हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने देवी सती की मृत्यु के बाद तेज़ शोक में धरती पर आंसू बहाए, जिनसे यह तालाब बना। �


मंदिरों का परिसर एक पवित्र तालाब के इर्द-गिर्द बना है, जहाँ आज भी श्रद्धालु स्नान कर पुण्य जुटाते हैं। �


📖 पौराणिक कथाएँ:

कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव भाइयों ने अपनी जलाई (वनवास) के समय यहाँ ठहरकर समय बिताया था। 

मंदिर हिन्दू धर्म में शिवजी की आस्था का बड़ा पूजास्थल माना जाता है और यहाँ महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर भक्तों का आगमन होता है। �


🛕 परिसर:

कटास राज के भीतर कई छोटे-बड़े मंदिर शामिल हैं, जिनमें शिव मंदिर, रामचंद्र मंदिर, हनुमान मंदिर और सतघड़ा नामक सात मंदिरों का समूह है। 

यह ऐतिहासिक स्थल आज भी हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षक है, और पाकिस्तान सरकार समय-समय पर धार्मिक यात्राओं और दर्शन के लिए वीजा भी जारी करती है। 

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